प्रेषक – आतिफ अली
आँटी ने मुझे कहा “बेटा, क्या तुम हमारा एक काम कर दोगे?”
“कहिए आँटी जी,” मैंने डरते हुए कहा।
उन्होंने कहा, “बेटा, मेरा हाथ नहीं पहुँच रहा है, तुम मेरा एक डिब्बा उतार दो।”
मैंने कहा- ठीक है। फिर मैं उनके घर चला गया, वहाँ ऊँचाई पर एक डिब्बा रखा हुआ था, आँटी ने बताकर कहा,”बेटा यही डिब्बा उतारना है।”
मैंने डिब्बा उतार दिया। तभी आँटी ने गेट बन्द कर लिया।
मैंने कहा- आँटी ! मैं जाता हूँ, तो उसने मुझे बुलाया, “इधर आओ,”
यह सुनकर मेरी तो हवा ही खिसक गई, लेकिन फिर मैं भी हिम्मत करके चला गया। मैंने कहा “कहो आँटी, क्या कोई और कोई काम है?”
“नहीं, एक बात पूछनी थी।” आँटी ने कहा।
मैं डर गया, डरते-डरते मैंने कहा, “कहिए आँटी जी !”
आँटी ने पूछा, “तुम्हारी उम्र कितनी है?”
मैंने जवाब दिया, “आँटी जी, २३ साल !”
फिर आँटी ने कहा कि मेरी उम्र ४० साल है और मैंने तुम्हारी माँ के उम्र की हूँ, तुम्हें शर्म नहीं आई दुकान पर ऐसी हरक़त करते हुए?