प्रेषिका : निकिता सिंह
वेटर तो बोल कर चला गया, मैं समझ गया कि वेटर हमें पति पत्नी समझ रहा है। फ़िर मैं कमरे में आया तो दीदी पलंग पर लेटी हुई थी।
मैंने कहा- दीदी ! तुम बहुत थक गई हो ! थोड़ा फ़्रेश हो लो। फ़िर हम खाना खाएंगे।
दीदी बोली- तुम ठीक ही कहते हो !
और दीदी ने बैग खोल कर अपने कपड़े निकाले और बाथरूम में चली गई।
मेरे मन में वेटर की बात घूम रही थी और मैं दीदी के साथ अपने ही बारे में सोचने लगा। बाथरूम से दीदी के नहाने की आवाज़ आ रही थी। मैं कल्पना करने लगा कि काश मैं और दीदी साथ साथ नहाते !
मुझे लगता था कि वेटर की बात सच हो सकती है। मैं इस बारे में योजना बनाने लगा तो मुझे रिसेप्शन वाले की व्यस्क फ़िल्म वाली बात याद आई। तभी मैंने घड़ी में देखा तो सवा दस बजे थे। तो मैंने ५ नम्बर का चैनल लगाकर बैठ गया और रिमोट को तकिए के नीचे छुपा दिया, साथ में खाने का ऑर्ड्र भी दे दिया।
५ मिनट के बाद दीदी बाहर आई। उन्होंने सेक्सी फ़िगर पर सफ़ेद रंग की नाईटी पहनी थी। मैंने कभी भी उनको ऐसी नियत से नहीं देखा था। आज वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी। उन्होंने कहा- जाओ तुम भी नहा लो !
दीदी दर्पण में बाल बनाने लगी थी। उनका ध्यान टीवी पर नहीं था।
मैं तुरन्त बाथरूम में घुस गया। मैंने बाथरूम में देखा कि दीदी की पैन्टी और ब्रा वहाँ सूख रही थी और मैंने उन्हें बैग से कपड़े निकालते देखा था तो उन्होंने पैन्टी नहीं निकाली थी, सिर्फ़ ब्रा ही थी। तो मैं समझ गया कि दीदी ने पैन्टी नहीं पहनी है।